Thursday, December 10, 2015

श्री शैलं टाइगर रिजर्व एवं हैदराबाद



 

 यह भारत का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। श्री शैलं पहुँचने तक लगभग 60 किमी का रास्ता इस टाइगर रिजर्व में हमने गुजारा। उस दिन बंगाल की खाड़ी में विक्षोभ था और घना कोहरा टाइगर रिजर्व में उतर गया था। मैंने जीवन में पहली बार वो घास के मैदान देखें जिन्हें मीडोज कहा जाता है जो शेर का बसेरा बनते हैं। बाँस के झुरमुट के बीचोंबीच यह घास के मैदान फैले हैं। थोड़ी-थोड़ी दूरी पर कुछ-कुछ पेड़। जैसे घास के मैदान के बीच इन पेड़ों ने लीज में अपनी जमीन ले ली है। जंगल के बीच-बीच पिकनिक के चिन्ह नजर आते हैं। यह इलाका ऐसे लगता है जैसे बरसों से यहाँ मनुष्य की प्रजाति नहीं आई। कुछ हिरण मुझे नजर आए। अगर यहाँ शेर न भी दिखे तो भी जंगल इतना खूबसूरत है कि अपने जीवन में हर व्यक्ति को यहाँ कई बार आने की कोशिश करनी चाहिए।

जैसे शाहजहाँ ने काश्मीर को अपनी तफरीह के लिए चुना, वैसे ही विजयनगर के राजाओं ने भी यहाँ आरामगाह बनाए, निजाम के शिकार के लिए कई आरामगाह भी यहाँ बनाए गए। इस जगह की खूबसूरती को देखकर ही लगता है कि जंगल के राजा ने यहाँ रहने का चुनाव क्यों किया होगा। और जब शिव जी को सपत्नीक आंध्र में रहने की इच्छा पैदा हुई तो उन्होंने यह जगह क्यों चुनी हुई होगी। इस मामले में वो विष्णु जी से कहीं आगे बढ़ गए क्योंकि तिरूमाला की पहाड़ियाँ खूबसूरत होने के बावजूद भी उनमें घास के मैदानों की वैसी कशिश नहीं है जो श्री शैलं में है।

आंध्रप्रदेश की बसों में यात्रियों के लिए टीवी भी लगे हैं। टाइगर रिजर्व खत्म होने पर मैंने तेलुगु सिनेमा का आनंद लिया। तेलुगु सिनेमा में दक्षिण की अलग ही दुनिया नजर आती है। मंदिर के धीर-गंभीर लोगों की तुलना में यहाँ लोग काफी उनमुक्त दिखते हैं और यहीं पर यह सिनेमा भोजपुरी सिनेमा जैसा लगने लगता है।

हैदराबाद पहुँचते हुए शाम हो गई थीं। अब केवल एक साइट ही हम लोग देख सकते थे बिरला मंदिर। हमारे आटो ड्राइवर ने बताया कि यह आदर्श नगर में पड़ता है और बंजारा हिल्स के साथ ही यह भी हैदराबाद की सबसे पॉश लोकैलिटी है। उसने हमें एक पूरा काम्पलेक्स दिखाया जहाँ पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव का परिवार रहता है और वो टेनिस परिसर भी जहाँ सानिया मिर्जा की टेनिस परवान चढ़ी। उसने बताया कि सानिया अक्सर यूके में रहती है और कभी-कभी ही हैदराबाद आती है।

फिर हम बिरला मंदिर गए। इसे ऊँची पहाड़ी में बनाया गया है जहाँ हुसैन सागर झील का सुंदर नजारा दिखता है। वहाँ से हमने नैकलेस रोड को भी देखा जिसकी इज्जत हैदराबाद में मरीन ड्राइव की तरह है।

पापा ने बताया कि बिरला ने अभी नया रायपुर में भी मंदिर के लिए जगह माँगी है दुर्भाग्य से हमारे यहाँ कोई ऊँची पहाड़ी नहीं, फिर भी संतोष इस बात का है कि बिरला परिवार की धार्मिक आस्था बनी हुई है।

जब हम बिरला मंदिर जाने वाले थे, उसी समय दूरदर्शन पर गोवा फिल्म फेस्टिवल की शुरूआत हो रही थी। यह प्रोग्राम इतना अच्छा था कि हमारे साथ आए बड़े पिता जी ने होटल में ही रहकर प्रोग्राम देखने का फैसला किया। प्रोग्राम को होस्ट कर रही थीं अदिती राव। अदिती ने एक सुंदर तेलुगु गाना गाया, उनकी आवाज इतनी मीठी लगी कि मैंने बाद में इंटरनेट में उनके बारे में सर्च किया। उन्होंने रॉकस्टार फिल्म में अभिनय किया था। वो राजघराने से हैं और उनके पिता निजाम के नायक थे। वे किरण राव की बहन हैं जो आमिर खान की पत्नी हैं। इस तरह अदिती के बहाने किरण राव की कुंडली भी हाथ लग गई। मैंने केवल परवीन बाबी के बारे में सुन रखा था कि वे जूनागढ़ परिवार से हैं। इसके बाद मैंने सर्च किया कि कौन सी ऐसी एक्ट्रेस हैं जिनके लिंकेज राजपरिवार से है तो पता चला कि भाग्यश्री भी राजपरिवार से हैं उनके पिता महाराष्ट्र की सांगली रियासत के राजा हैं। प्रोग्राम की जो बात सबसे ज्यादा दिल को छू गई। वो इलैयाराजा को सुनना। इलैयाराजा ने कहा कि म्यूजिक को पूरे देश की पढ़ाई में अनिवार्य कर देना चाहिए। आतंकवाद को खत्म करने का यह बड़ा उपाय हो सकता है क्योंकि संगीत मन को बेहद शांत कर देता है। इलैयाराजा ने यह भी कहा कि मैं भारत का एकमात्र संगीतकार हूँ जो एसेंडिंग नोट्स में म्यूजिक देता है।

अगले दिन हमने गोलकुंडा के किले और सालारजंग म्यूजियम के बजाय रामोजी फिल्म सिटी देखने का फैसला किया।

क्रमशः

 

 

 

2 comments:

  1. अरे वाह , बढ़िया यात्रा वृतांत

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  2. बहुत ही शानदार यात्रा वृतांत।

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आपने इतने धैर्यपूर्वक इसे पढ़ा, इसके लिए आपका हृदय से आभार। जो कुछ लिखा, उसमें आपका मार्गदर्शन सदैव से अपेक्षित रहेगा और अपने लेखन के प्रति मेरे संशय को कुछ कम कर पाएगा। हृदय से धन्यवाद